मेरे घर वाला जहाँ मैं और ताऊ बैठ कर जहाँ भर की ठिठोली करते थे जहाँ होती थी बाते कि बुश ने कितने "बम्ब" गिराए ईराक़्क पर वो बम बम्ब और इराक को ईराक़्क बोला करते थे माँ हमारी बातों से खौलती थी पापा बोलते थे खेलने दो मैं मासूमियत से पूछता था जब इतने बम्ब गिरते है वहाँ , तो लोग नीम के पेड़ के नीचे कैसे बैठ पाते होंगे ताऊ बोलता ~ ठीक वैसे ही जैसे यहाँ बैठे है हम लोग और फिर एक जोर का पुलिसिया ठहाका जिसमे मेरी हंसी भी मिली होती थी I
मैंने एक भरम पाला
उसको पोसा
खाना दिया
पानी दिया
जहाँ भी गया
जेब में लेकर गया
उसके साथ सोया
उसी साथ जागा
कभी देर रात छज्जे पर
हम चाँद तके साथ साथ
मैंने अपने भरम को
किसी ख़ास को दिखाया
हर आम से छुपाया
कभी कमरे में छूट गया वो भरम तो
सात खड़ी सीढियाँ चढ़ ,
भरम को वापस लाया
देखो न, मेरा भरम
वास्तव में बदल गया !!!!
पहले प्यार होता है,
फिर लड़ाई होती है,
फिर लड़ाई में छुपा हुआ प्यार होता है ,
बीच में खुल के प्यार भी हो जाता है ,
फिर लड़ाई होती है,
फिर लड़ाई में छुपा हुआ प्यार होता है !!!
मैं उसे नहीं जानता ,
नहीं ...... कतई नहीं ,
उसकी बहकी बातों .... चाँद को छूने को .
मेरा कोई सरोकार नही .
भला ऐसा भी कही होता है
कही ऐसे भी किसी के पहचान होते है .
ख्वाब देखने वालों के साथ उठता बैठता कौन है ???