Wednesday, April 15, 2020

यह सब कर्ण बनने की प्रक्रिया भर है ।

अर्जुन तो अमर है,
पर कर्ण भी कहाँ कमतर है,
किंचित कष्ट नही कि,
कि कुछ रूग्ण है, 
कुछ रुष्ट है,
कुछ विघ्न है,
और कुछ विध्वंस भी है, 
पर यह सब कर्ण की, कर्ण बनने की प्रक्रिया भर है ।

मैं इस शहर का होना चाहता हुँ ।

पैसा यहाँ,
जरूरत से ज्यादा आदत है,
मामा मारीच की ये नगरी,
आपकी मृगतृष्णा  को जगाये रखती है,
आपको  दिन रात भगाये रखती है,
निन्न्यानवे के फेर में,
कब निन्यानवे के हो लेंगे,
आप यकीन ही नही कर पाएंगे,
धनपशुओं, धनलोलुपों को,
दिन रात धन के पीछे भागते देखना ही,
इस शहर में आपका होना है । 

Monday, August 7, 2017

वही सब मैं भी झेल-खेल कर आया हूँ.

तुम जिस, हवा-पानी, खाद-मिटटी, धूल-धुंध, धुवां-कोहरा, को झेल-खेल कर आये हो, वही सब मैं भी झेल-खेल कर आया हूँ , यु नो !!!

Thursday, June 8, 2017

बुश ने कितने "बम्ब" गिराए ईराक़्क पर I

नीम का पेड़ 
राही मासूम रज़ा वाला नहीं 
मेरे घर वाला 
जहाँ मैं और ताऊ
बैठ कर जहाँ भर की ठिठोली करते थे
जहाँ होती थी बाते कि
बुश ने कितने "बम्ब" गिराए ईराक़्क पर
वो बम बम्ब और इराक को ईराक़्क बोला करते थे
माँ हमारी बातों से खौलती थी
पापा बोलते थे खेलने दो
मैं मासूमियत से पूछता था
जब इतने बम्ब गिरते है वहाँ , तो लोग नीम के पेड़ के नीचे कैसे बैठ पाते होंगे
ताऊ बोलता ~ ठीक वैसे ही जैसे यहाँ बैठे है हम लोग
और फिर एक जोर का पुलिसिया ठहाका जिसमे मेरी हंसी भी मिली होती थी I

Thursday, April 20, 2017

देखो न, मेरा भरम वास्तव में बदल गया !!!!

मैंने एक भरम पाला
उसको पोसा
खाना दिया
पानी दिया
जहाँ भी गया
जेब में लेकर गया
उसके साथ सोया
उसी साथ जागा
कभी देर रात छज्जे पर
हम चाँद तके साथ साथ
मैंने अपने भरम को
किसी ख़ास को दिखाया
हर आम से छुपाया
कभी कमरे में छूट गया वो भरम तो
सात खड़ी सीढियाँ चढ़ ,
भरम को वापस लाया
देखो न, मेरा भरम
वास्तव  में बदल गया !!!! 

Sunday, April 2, 2017

पहले प्यार होता है !!!

पहले प्यार होता है,
फिर लड़ाई होती है,
फिर लड़ाई में छुपा हुआ प्यार होता  है ,
बीच में खुल के प्यार भी हो जाता है ,
फिर लड़ाई होती है,
फिर लड़ाई में छुपा हुआ प्यार होता है !!!

Saturday, February 11, 2017

ख्वाब देखने वालों के साथ उठता बैठता कौन है ???

मैं उसे नहीं जानता ,
नहीं ...... कतई नहीं ,
उसकी बहकी बातों .... चाँद को छूने को .
मेरा कोई सरोकार नही .
भला ऐसा भी कही होता है
कही ऐसे भी किसी के पहचान होते है .
ख्वाब देखने वालों के साथ उठता बैठता कौन है ???